Interesting things & Facts About indian flag

दोस्तों 26 जनवरी आने वाला है और हम अपने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को लहराने के लिए अभी से तेयारियों में हैं, दिल्ली में इंडिया गेट पर झांकियां दिल छू जायेंगी तो हमारा तिरंगा भी शान से लहराएगा आपको बता दें कि 22 जुलाई 1947 के दिन संविधानसभा ने तिरंगे को, देश के झंडे के रूप में स्वीकार किया था। हमें भारत के झंडे के बारे में जानकारी होना जरूरी है, आईये जानते हैं भारत के झंडे के बारे में कुछ दिलचस्प बातें…

भारतीय ध्वज को पिंगली वैंकैया ने डिजाइन किया था, जो एक किसान व स्वतंत्रता सेनानी थे। भारत के ध्वज कोड के अनुसार भारतीय ध्वज दो अनुपाते तीन में होता है, जहां ध्वज की लम्बाई, चौड़ाई का डेढ़ गुना होती है।

राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण का कार्य खादी विकास एवं ग्रामोद्योग आयोग को सौंपा गया है, जो इसकी जिम्मेदारी क्षेत्रीय समुदायों को सौंप देती है। भारत के राष्ट्रीय ध्वज को “तिरंगा” नाम से भी सम्बोधित करते हैं। इस नाम के पीछे की वजह इसमें इस्तेमाल होने वाले तीन रंग हैं, केसरिया, सफ़ेद और हरा।

रंगों के बारे में : –

केसरिया: त्याग और बलिदान का प्रतीक
सफेद: सत्य, शांति और प‌वित्रता का प्रतीक
हरा: समृद्धता का प्रतीक

अशोकचक्र: न्याय का प्रतीक :-

अशोक चक्र के बारे में- सम्राट अशोक के बहुत से शिलालेखों पर प्रायः एक चक्र बना हुआ है। इसे अशोक चक्र कहते हैं। यह चक्र धर्मचक्र का प्रतीक है। उदाहरण के लिए सारनाथ स्थित सिंह-चतुर्मुख एवं अशोक स्तम्भ पर अशोक चक्र विद्यमान है। भारत के राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र को स्थान दिया गया है।अशोक चक्र में चौबीस तीलियां हैं वे मनुष्य के अविद्या से दु:ख बारह तीलियां और दु:ख से निर्वाण बारह तीलियां की अवस्थाओं का प्रतिक है। अशोक चक्र, सम्राटअशोक के समय से शिल्प कलाओं के माध्यम से अंकित किया गया था। धर्म-चक्र का अर्थ भगवन बुद्ध ने अपने अनेक प्रवचनों में अविद्या से दू:ख तक बारह अवस्थाये और दू:ख से निर्वाण की बारह अवस्थाएं बताई है।

सम्राट अशोक ने प्रत्येक नागरिक को खुश रहने के लिये 2 मुख्य बिन्दु बताये – न अधिक तेज, न अधिक धीमा। सम्राट अशोक के द्वारा बताये गये जीवन के 4 प्रमुख कारण बताये – दुनिया मेँ दुःख है, दुःख का कारण है, कारण का निवारण है, निवारण के प्रति प्रयास करना।

सम्राट अशोक ने अपने राजतंत्र मेँ 8 महत्व पूर्ण बाते समाज के सामने रखी- सबकोशिक्षा, सबकोसम्मान, सबको मानसिकस्वतंत्रता, सबकोरोजगार, सबकोन्याय, सबकोचिकित्सा, सबको कर्त्वयोँ के प्रति जागरुक रहना, सभी को राष्ट्र के प्रति समर्पित।

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